ट्राउट मत्स्य पालन से बागेश्वर में स्वरोजगार को नई दिशा, गांव में ही बढ़ी आय की संभावनाएं।
गुरजोत सिंह राठौर – सवांददाता
बागेश्वर, 15 सितंबर। जिले में ट्राउट मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार और बेहतर आय का जरिया बनता जा रहा है। विभागीय योजनाओं, तकनीकी सहयोग और स्थानीय जल संसाधनों के उपयोग से कई मत्स्य पालक अपनी आजीविका मजबूत करने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ रहे हैं।
बागेश्वर विकासखंड के ग्राम सानिउडियार निवासी चन्द्रशेखर इसका उदाहरण हैं। वर्ष 2016 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद उन्होंने दिल्ली के एक होटल में कुक के रूप में काम किया। वर्ष 2019 में नौकरी छोड़कर गांव लौटे और मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया। वर्ष 2021-22 में विभाग से मोबाइल फिश वैन मिलने के बाद उन्होंने ट्राउट से तैयार व्यंजनों की बिक्री शुरू की। वर्तमान में उन्हें करीब 55 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह आय हो रही है और उनके माध्यम से दो अन्य लोगों को रोजगार भी मिला है।
कपकोट विकासखंड के ग्राम जगथाना निवासी चन्दन सिंह भी पिछले 10 वर्षों से ट्राउट उत्पादन से जुड़े हैं। वर्तमान में वह प्रतिवर्ष करीब 35 कुंतल ट्राउट का उत्पादन कर रहे हैं और लगभग 30 लोगों को रोजगार से जोड़ चुके हैं। उनके उत्पाद की मांग आईटीबीपी, एसएसबी के साथ ही विभिन्न होटल और रेस्टोरेंट में है।
वहीं ग्राम लीती की प्राथमिक मत्स्य जीव सहकारी समिति के 15 सदस्य सक्रिय रूप से मत्स्य पालन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत समिति के लिए 10 रेसवे बनाए गए हैं। समिति ने मार्च 2026 तक करीब 16 कुंतल ट्राउट का उत्पादन कर लगभग 8 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
ट्राउट मत्स्य पालन के इन प्रयासों से युवाओं को गांव में ही रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ आत्मनिर्भरता और रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

