उत्तराखण्ड चंपावत न्यूज वाइरल ख़बर स्वास्थ

पैतृक भूमि पर आधुनिक खेती कर विनोद सिंह ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल।

पैतृक भूमि पर आधुनिक खेती कर विनोद सिंह ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल।पैतृक भूमि पर आधुनिक खेती कर विनोद सिंह ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल।

 

गुरजोत सिंह राठौर – सवांददाता

 

चम्पावत, 15 सितंबर। विकासखंड बाराकोट के ग्राम च्यूरानी निवासी युवा किसान विनोद सिंह ने पैतृक भूमि पर आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को अपनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। परास्नातक (एमए) और आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा धारक विनोद सिंह ने नौकरी के बजाय खेती को स्वरोजगार का माध्यम बनाया।

 

 

 

उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग और विभागीय योजनाओं का लाभ लेते हुए उन्होंने करीब 40 नाली भूमि पर पॉलीहाउस, खुले खेतों और फलोद्यान को मिलाकर एकीकृत खेती शुरू की है। खेत में बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन के लिए पॉलीहाउस, सिंचाई के लिए जल संचयन टैंक और जैविक खाद तैयार करने के लिए वर्मीकम्पोस्ट इकाई स्थापित की गई है।

 

 

 

पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जियों की पौध और फसलें तैयार की जा रही हैं। वहीं खुले खेतों और ढलानों पर बंद गोभी, फूल गोभी, मूली, फ्रासबीन, कद्दू, लौकी और ककड़ी का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा आम, अमरूद और अनार का फलोद्यान भी विकसित किया गया है।

 

 

 

वर्ष 2025-26 में विनोद सिंह ने 12 क्विंटल बंद गोभी, 10 क्विंटल शिमला मिर्च, 10 क्विंटल आम, 10 क्विंटल अमरूद और 7 क्विंटल मूली समेत विभिन्न फसलों का उत्पादन किया। वह रासायनिक खादों से दूरी रखते हुए स्वयं तैयार वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।

 

 

 

विनोद सिंह का कृषि प्रक्षेत्र अब आसपास के किसानों और युवाओं के लिए सीखने का केंद्र बन रहा है। स्थानीय काश्तकार यहां पॉलीहाउस प्रबंधन, जल संचयन और जैविक खेती के तौर-तरीके सीख रहे हैं। उनका यह प्रयास पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक खेती को रोजगार और आय का बेहतर माध्यम बनाने की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।