नगरपालिका के स्टोर से पशु बाजार तक व्यवस्थाओं पर सवाल, निरीक्षण में सामने आईं कई खामियां।
गुरजोत सिंह राठौर -सवांददाता
नैनीताल। नगरपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर मंडलायुक्त दीपक रावत के निरीक्षण में कई खामियां सामने आने की बात कही गई है। स्टोर में सामग्री के रखरखाव और वितरण से लेकर पशु बाजार के संचालन और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण तक व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हैं। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
स्टोर में रखे डस्टबिन, चूना, ब्लीचिंग पाउडर और झाड़ू समेत अन्य सामग्री के वितरण का विधिवत रिकॉर्ड नहीं मिला। बताया गया कि सामान के लेन-देन का हिसाब आधिकारिक रजिस्टर के बजाय सामान्य पर्चियों पर रखा जा रहा था। खरीदी गई सामग्री का विवरण मौजूद होने के बावजूद मौके पर उपलब्ध स्टॉक का स्पष्ट मिलान नहीं हो सका।
मंडलायुक्त दीपक रावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी नैनीताल से तथ्यात्मक जांच कराने को कहा है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
28 लाख के पशु बाजार में भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान नगरपालिका के पशु बाजार की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे। बाजार करीब 28 लाख रुपये के सालाना टेंडर पर दिए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन ठेकेदार के पास अपने कर्मचारियों और स्टाफ से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
पशुओं के प्रवेश और बिक्री के रिकॉर्ड को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। बाजार में आने वाले पशुओं की आवश्यक अनुमति, दस्तावेज, बिक्री की जानकारी, कीमत और स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
मामले में नगरपालिका को पुलिस में तहरीर देने के साथ पशु क्रूरता निवारण कानून समेत अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी पर सख्ती
कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर भी मंडलायुक्त ने सख्त रुख अपनाया। पर्यावरण मित्रों समेत सभी कर्मचारियों की शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक हाजिरी सुनिश्चित नहीं होने पर अधिशासी अधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं। व्यवस्था दुरुस्त होने तक वेतन रोकने की बात कही गई।
प्लास्टिक कचरे के टेंडर की भी होगी जांच
प्लास्टिक कचरे के निस्तारण से जुड़े टेंडर को लेकर भी सवाल उठे हैं। कचरा जिस संस्था को भेजा जा रहा है, उसकी गतिविधियों और पूरी प्रक्रिया की जांच के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण में प्लास्टिक कचरे की तुलाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटा और सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाएं नहीं होने की बात सामने आई।
ऐसे में कचरे की तुलाई में गड़बड़ी और नगरपालिका के राजस्व को संभावित नुकसान की आशंका जताई गई है। मंडलायुक्त ने पूरे मामले में जिलाधिकारी से तथ्यात्मक जांच कराने को कहा है।
निरीक्षण के बाद अब नगरपालिका की व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों पर जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामने आई खामियों के लिए कौन जिम्मेदार है और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है।

